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जानलेवा मोड़ व तेज रफ्तार बन रहा दुर्घटना का कारण


कोरबा । जिले के मुख्यमार्गों में ऐसे अनेको खतरनाक मोड़ है। जो जरा सी चूक पर जानलेवा साबित हो सकते है। ऐसे मार्गों पर लोक निर्माण विभाग द्वारा संकेतक बोर्ड भी नही लगाया गया है।जिसके परिणामस्वरूप तेज रफ्तार छोटे-बड़े वाहन अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते है।जिले के बगदेवा से कटघोरा होते हुए कोरबा,कटघोरा से अम्बिकापुर,कोरबा से चाम्पा,दीपका व जटगा-पसान मार्ग में ऐसे कई खतरनाक मोड़ है।जहाँ से गुजरने पर सूचना या संकेतक बोर्ड ही नही दिखता और रफ्तार की वजह से उन मोड़ पर अधिकांश हादसे घटित हो जाते है।जो अधिकतर जानलेवा साबित होते है।लेकिन इस दिशा पर लोनिवि विभाग द्वारा लगातार उदासीन रवैया अपनाया हुआ है। आए दिन हो रहे सड़क दुर्घटना को लेकर अंधे मोड़ और वाहनों की रफ्तार को भी एक अहम कारण माना जा रहा है।जिसमे मोड़ से गुजरते वक्त वाहनों की रफ्तार व विपरीत दिशा से आते वाहन दूर से नही दिख पाते।और दुर्घटना घटित हो जाती है।ऐसे हादसों में ना जाने अब तक कितनो की जान गई होगी।और कितने घायल व अपाहिज हुए होंगे।यह आंकलन लगा पाना मुश्किल है। बीते 7 जनवरी को ही जटगा-पसान मुख्यमार्ग में कसनिया लकड़ी डिपो के आगे अंधे मोड़ पर हुए दुर्घटना में ग्राम सिंघिया निवासी मोटरसाइकिल सवार दो सगे भाई में चालक की मौत हो गई।जबकि पीछे बैठा दूसरा गम्भीर रूप से घायल हो गया।
घटना के संबंध में बताया गया कि घुमावदार मोड़ में वाहन पर से चालक का संतुलन हट गया तथा बाइक सीधे एक पेड़ से जा टकराई।उक्त मोड़ की अगर बात करें तो इस जगह पर यह कोई पहली घटना नही है।जिसमे किसी एक कि जान गई हो।वरन यहाँ अक्सर ऐसे जानलेवा हादसे होते ही रहते है।लोक निर्माण विभाग द्वारा जिले भर के ऐसे मोड़ो को डेंजर जोन के दायरे में रखा तो गया है।लेकिन फिलहाल अभी तक इनकी कुम्भकर्णीय निंद्रा नही टूटी है।शायद इसी वजह से जिले के अनेको ऐसे डेंजर जोन में सतर्कता से संबंधित सूचना या संकेतक दिखाई ही नही देता।एक तरफ जिले में सड़क दुर्घटनाओं के रोकथाम व वाहन चालन की दिशा पर जनजागरूकता हेतु यातायात पुलिस द्वारा यातायात जागरूकता अभियान सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।वहीं दूसरी ओर छोटे-बड़े सड़क हादसे आए दिन देखने सुनने को मिल रहे है।जिले में जर्जर सड़क की दुर्दशा की मार तो लोग झेल ही रहे है।दूसरी ओर अंधे मोड़ व बिना मापदंड सड़क तथा तेज रफ्तार वाहनों के आवागमन के बीच सफर तय करने तक भय बना रहता है कि सामने या पीछे से तेज रफ्तार गुजरती वाहन कहीं अपनी चपेट में ना ले ले।और गतंव्य तक पहुँचने से पहले ऐसा लगता है,मानो सिर पर कफन बांध कर सफर कर रहे हों।  

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