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कैग रिपोर्ट ने दिए संकेत, राफेल की डिलीवरी में लग सकते हैं सात साल


नईदिल्ली । कैग की रिपोर्ट में संकेत है कि राफेल विमानों की डिलीवरी में सात साल से भी अधिक की देरी हो सकती है. रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि 36 राफेल फाइटर जेट की सीधे तौर पर खरीद की जाएगी. अपनी रिपोर्ट में कैग ने ये भी कहा कि यूपीए सरकार के समय में साइन किए गए भारत व फ्रांस के बीच की डील में डिलीवरी के समय में सिर्फ एक महीने का ही सुधार हुआ है.
हालांकि, राफेल पर बातचीत के लिए बनी भारतीय टीम को इस बात की चिंता थी कि क्या इस वक्त तक भी इसकी डिलीवरी हो पाएगी? दरअसल, सौदे के वक्त राफेल का निर्माण करने वाली दसॉ एविएशन के पास पहले से ही 83 एयरक्राफ्ट्स बनाने और डिलीवरी करने का काम बाकी था. इस वक्त कंपनी लगभग 11 एयरक्राफ्ट हर साल बना पाती है. इस हिसाब से देखा जाए तो इसे ही पूरा करने में लगभग सात साल से ज्यादा का समय लग जाएगा.
जब कैग ने इस बारे में रक्षा मंत्रालय से पूछा तो जवाब मिला कि प्रोजेक्ट अभी शिड्यूल में है और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम व इंटर-गवर्मनमेंटल बाइलैटरल हाई लेबल ग्रुप इस पर बातचीत कर रहे हैं.
हालांकि ये बात सार्वजनिक नहीं की गई है कि अगर दसॉ समय पर राफेल की डिलीवरी नहीं कर पाता तो क्या उसके ऊपर कोई पेनल्टी लगाई जाएगी. लेकिन एक बात तो कैग रिपोर्ट से स्पष्ट है कि बैंक और गारंटी के जो क्लॉज़ दसॉ के 2007 के प्रस्ताव में रहे हैं उन्हें एनडीए सरकार ने 2015 में खत्म कर दिया था.
भारत सरकार ने पूरी तरह से फ्रांस में बने राफेल को खरीदने का फैसला करने के बाद अपने ही मेक इन इंडिया प्रोग्राम को ताक पर रख दिया है. लेकिन, सरकार का इसमें कहना है कि इससे राफेल की डिलीवरी जल्दी हो जाएगी.
हालांकि, राफेल बातचीत की अगुवाई करने वाले एयर मार्शल एसबीपी सिन्हा ने कहा कि राफेल की डिलीवरी तय समय से सात महीने पहले ही हो जाएगी और इसमें सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन का काम दो महीने बाद शुरू कर दिया जाएगा, और उसके अगले एक महीने में ये काम भी पूरा हो जाएगा. 

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