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किसान चाहे तो अधिग्रहित भूमि की वापसी की पहल की जा सकती है : जयसिंह


कोरबा। छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आज कहा कि प्लांट या अंडरटेकिंन के लिए अधिग्रहित भूमि यदि किसानों को वापस चाहिये और प्लांट नहीं लगा हो, तो भूमि वापसी की पहल की जा सकती है।
राजस्व मंत्री अग्रवाल आज यहां पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उनसे पूछा गया था कि क्या टाटा स्टील की तरह कोरबा के देबू और अन्य उद्योगों के लिए अधिग्रहित भूमि भी किसानों को वापस की जायेगी। अग्रवाल ने कहा कि हर प्लांट और अण्डरटेकिंग का अलग-अलग इशू है। उन्होंने टाटा स्टील बस्तर का उल्लेख करते हुए बताया कि बस्तर में टाटा स्टील ने स्वयं चिट्ठी लिखकर पैसा वापस लेने की पहल की थी। उसकी पूरी जमीन का अधिग्रहण भी नहीं हो पाया था और पूरा मुआवजा भी नहीं बंटा था।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांगे्रस ने अपने चुनाव जन घोषणा पत्र में बस्तर के लोहाण्डीगुड़ा ब्लाक के दस गांवों में टाटा स्टील के लिए अधिग्रहित एक हजार सात सौ चौसठ (1764) हेक्टेयर कृषि भूमि किसानों को वापस दिलाने का वायदा किया था। कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बस्तर की अपनी चुनावी सभाओं में टाटा स्टील के लिए अधिग्रहित कृ षि भूमि किसानों को वापस दिलाने का वादा किया था। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ ग्रहण के बाद अधिकारियों को जमीन वापसी का प्रस्ताव बनाकर केबिनेट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। राज्य मंत्रि मण्डल ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर भी लगा दी है।
याद रहे कि वर्ष-2005 में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने टाटा स्टील के साथ उन्नीस हजार पांच सौ (19500) करोड़ रूपयों के एम.ओ.यू.पर हस्ताक्षर किया था। बस्तर जिले के लोहाण्डीगुड़ा सहित दस गांवों में 2008 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ हुई थी। कुल एक हजार सात सौ सात (1707) किसानों में से एक हजार पैसठ (1065) किसानों ने अपनी कृषि भूमि का मुआवजा प्राप्त कर लिया था। जबकि शेष भूमि के मुआवजा की राशि राजस्व जमा निधि में जमा करा दिया गया था। हालाकि पिछले  दस वर्षो में टाटा स्टील अपना संयंत्र स्थापित नहीं कर पाया है। अब तो अधिग्रहित भूमि किसानों को वापस लौटायी जा रही है और उद्योग स्थापना की संभावना ही समाप्त हो गयी है। 

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