सीबीआई में आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना: कैसे शुरू हुआ विवाद, जानिए सब?

 
नई दिल्ली । सीबीआई बनाम सीबीआई के विवाद में डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायेक्टर (एजेंसी में नंबर 2) राकेश अस्थाना को केंद्र सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है। इनकी जगह एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव के साथ अंतरिम प्रमुख नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार का यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट में चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद आया जहां राकेश अस्थाना की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई लेकिन एफआईआर रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई।
दोनों के बीच एजेंसी में काम करते हुए भी कभी अच्छे रिश्ते नहीं रहे, दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहे। आइए जानते हैं सीबीआई में घमासान की शुरुआत कब हुई-

अक्टूबर से शुरू हुई खींचतान

-आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच खींचतान पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई जब सीबीआई डायरेक्टर ने CVC के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय पैनल की बैठक में अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर प्रमोट किए जाने पर आपत्ति जताई।

अस्थाना को क्लीन चिट

-वर्मा का मानना था कि अधिकारियों के इंडक्शन को लेकर उनके द्वारा की गई सिफारिश को अस्थाना ने बिगाड़ दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले में अस्थाना की भूमिका के कारण CBI भी घेरे में आ गई। हालांकि पैनल ने आपत्ति को खारिज करते हुए अस्थाना को प्रमोट कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी राकेश अस्थाना को क्लीन चिट दे दी।

सीवीसी की मीटिंग में पहुंच गए अस्थाना

-12 जुलाई को जब आलोक वर्मा विदेश में थे, CVC ने सीबीआई में प्रमोशन को लेकर चर्चा करने के लिए मीटिंग बुलाई जिसमें अस्थाना को एजेंसी में नंबर 2 की हैसियत से बुलाया गया। इस पर वर्मा ने CVC को लिखा कि उन्होंने अपनी तरफ से मीटिंग में शामिल होने के लिए अस्थाना को अधिकृत नहीं किया है।

अस्थाना ने लगाए वर्मा पर आरोप

-24 अगस्त को अस्थाना ने CVC और कैबिनेट सेक्रटरी को लिखा, जिसमें वर्मा, उनके करीबी अतिरिक्त निदेशक एके शर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार की डीटेल दी। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कई आरोपियों को बचाने की कोशिश हुई। अस्थाना ने दावा किया कि हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना ने मोइन कुरैशी केस से खुद को बचान के लिए आलोक वर्मा को 2 करोड़ रुपये की घूस दी।

अस्थाना ने सीवीसी को दी सफाई

-पिछले हफ्ते अस्थाना ने फिर से CVC और कैबिनेट सेक्रटरी को लिखा और कहा कि वह पिछले महीने सना को गिरफ्तार करना चाहते थे लेकिन वर्मा ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि फरवरी में जब उनकी टीम ने सना से पूछताछ की कोशिश की थी, तो वर्मा ने फोन कर रोक दिया।

अस्थाना के स्टाफ का तबादला

- उधर, वर्मा ने अस्थाना द्वारा जांच किए जा रहे कई महत्वपूर्ण मामले वापस लेकर एके शर्मा को सौंप दिया। इसमें दिल्ली सरकार के मामले, आईआरसीटीसी घोटाला, पी चिदंबरम और अन्य के खिलाफ जांच शामिल थी। अस्थाना के स्टाफ का भी तबादला कर दिया गया।

व्यापारी ने लगाए अस्थाना पर आरोप
- 4 अक्टूबर को सीबीआई ने सना को पकड़ा और उसने अस्थाना के खिलाफ मैजिस्ट्रेट के सामने बयान दे दिया। सना ने दावा किया कि 10 महीने में उसने अस्थाना को 3 करोड़ रुपये दिए हैं।

- 15 अक्टूबर को CBI ने सना से 3 करोड़ की घूस लेने के आरोप में अस्थाना के खिलाफ केस दर्ज किया।

छुट्टी पर भेजे गए दोनों अधिकारी

- मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर यथापूर्व स्थिति को बनाए रखने का आदेश दिया और ट्रायल कोर्ट ने एक मिड लेवल अधिकारी देवेंद्र कुमार को घूस लेने के आरोप 7 दिन की रिमांड पर भेजा।

24 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया।