हर मां को पता होनी चाहिए ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी ये 5 बातें


जन्म के बाद बच्चा 6 महीने तक मां के दूध पर निर्भर होता है। मगर नई मांओं को स्तनपान के समय कई समस्याएं आती है क्योंकि उन्हें इससे जुड़ी कई बातों के बारे में सही जानकारी नहीं होती। ऐसे में आज हम आपको ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ी कुछ सवालों के जवाब देने जा रहे हैं, जो अक्सर नई मम्मियों के दिमाग में आते हैं। चलिए जानते हैं स्तनपान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें।

1. स्तनपान क्यों जरूरी है?

मां के दूध में ऐसे कई फायदे हैं, जो किसी भी फॉर्मूले से बने बाजारी दूध में नहीं मिल सकते। मां के दूध से न सिर्फ बच्चे का विकास अच्छी तरह से होता है बल्कि यह उन्हें कई बीमारियों से भी बचाता है इसलिए शिशु को स्तनपान करवाना बहुत जरूरी होता है।



2. ब्रेस्टफीडिंग पर दवाओं का साइड इफेक्ट
कुछ महिलाओं को लगता है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद दी जाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट से दूध बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। यह धारणा बिलकुल गलत है क्योंकि सिजेरियन डिलिवरी का लैक्टेशन से कोई संबंध नहीं है। बस आपको अपनी डाइट का ख्याल रखना चाहिए।

3. क्या प्रसव के तुरंत बाद दूध पीलाना सही है?

मां के पहला दूध पीला और गाढ़ा होता है इसलिए महिलाओं को लगता है कि जन्म के तुरंत बाद शिशु को फीड नहीं कराना चाहिए। मगर आपको बता दें कि डिलीवरी के बाद का दूध शिशु के लिए सबसे फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद कोलोस्ट्रम नामक तत्व शिशु के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।



4. मां को किस समय पर स्तनपान करवाना चाहिए?

मां को तभी दूध पिलाना चाहिए जब बच्चे को जरूरत हो। शुरुआती हफ्तों में बच्चे को हर दिन एक से दो घंटे स्तनपान करवाएं। धीरे-धीरे शिशु को तीन घंटे बाद दूध पिलाना शुरू कर दें।

5. ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए क्या करें?

ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपको प्रोपर आराम करना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं और सामान्य डाइट लें। इसके अलावा बच्चे को थोड़े-थोड़े समय पर फीड कराते रहें क्योंकि ब्रेस्ट जितना ज्यादा खाली होगा उतना ज्यादा ब्रेस्टमिल्क बनेगा।