2020 में भारत को मिलेंगी S-400 मिसाइल, रूस के साथ पक्की हुई डील: रिपोर्ट्स









नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच पांच S-400 मिसाइल डिफेंस डील पर करार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच नई के हैदराबाद हाऊस में हुई वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक में S-400 मिसाइल डिफेंस डील फाइनल हुई। पांच बिलियन डॉलर की इस मैगा डिफैंस डील से अब वायुसेना को 2020 तक S-400 मिसाइल मिल जाएगी। मोदी और पुतिन दोपहर 1.30 बजे ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आधिकारिक तौर पर S-400 मिसाइल के करार की घोषणा करेंगे। इस बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहीं।



S-400 के अलावा रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर भी समझौते हुए। बता दें कि पुतिन गुरुवार को दो दिवसीय यात्रा पर भारत आए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पुतिन के भारत पहुंचने पर उनकी अगुवानी की। रूसी राष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें उप-प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव, विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और व्यापार एवं उद्योग मंत्री डेनिस मंतुरोव शामिल हैं।

पुतिन का कार्यक्रम

मोदी के साथ बातचीत करने के अलावा रूसी नेता पुतिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ भी बैठक करेंगे। वे प्रतिभाशाली बच्चों के एक समूह के साथ भी बातचीत करेंगे और भारत-रूस व्यापार बैठक को संबोधित करेंगे।



S-400 मिसाइल डील पर ट्रंप की नजर

अमरीकी प्रतिबंध के साए में भारत और रूस एस-400 डिफैंस मिसाइल सिस्टम डील पर सहमति करने के लिए तैयार है। पांच बिलियन डॉलर की इस मैगा डिफैंस डील पर अमरीका काऊंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज सैंक्शन्स (काटसा) प्रतिबंध लगा सकता है। पिछले महीने अमरीका ने चीन पर यही बैन लगाया था। तब चीन ने रूस से लड़ाकू विमान और मिसाइल डिफैंस सिस्टम खरीदा था।



S-400 मिसाइल की खासियत

भारत अपने वायु रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली खरीदना चाहता है, खासतौर पर लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी चीन-भारत सीमा के लिए। इसमें दुश्मनों के लड़ाकू विमान गिराने की जबरदस्त क्षमता है। यह मिसाइल 400 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ रहे ड्रोन को आसमान में ही खत्म कर सकता है। इतना ही नहीं, एस-400 में अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को गिराने की भी ताकत है। अगर यह डील फाइल हो जाती है तो चीन के बाद भारत के पास भी यह ताकत होगी। बता दें कि चीन ने भी रूस से इस मिसाइल को खरीदा है।