vदुष्कर्म और POCSO मामलों की सुनवाई के लिए 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की तैयारी



नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी दी है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इस पर कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें केंद्र का हिस्सा 2,353.15 करोड़ और राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये होगा। केंद्र का खर्च निर्भया फंड से वहन किया जाएगा।


योजना के तहत देशभर में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इनमें विशेष POCSO अदालतें भी शामिल होंगी। प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारी तैनात किए जाएंगे, ताकि लंबित मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके।


इस योजना का उद्देश्य दुष्कर्म और POCSO अधिनियम के मामलों में सुनवाई तेज करना, लंबित मामलों की संख्या घटाना और पीड़ित महिलाओं एवं बच्चों को समय पर न्याय दिलाना है। इसके तहत बच्चों के अनुकूल अदालतें और संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्र विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।


योजना का क्रियान्वयन न्याय विभाग संबंधित राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन के साथ मिलकर करेगा। अदालतों के प्रदर्शन और मामलों के निपटारे की निगरानी FTSC डैशबोर्ड, प्रगति रिपोर्ट और उच्च न्यायालयों के साथ समीक्षा बैठकों के माध्यम से की जाएगी। नई अदालतों की स्थापना उन जिलों में प्राथमिकता के आधार पर होगी, जहां दुष्कर्म और POCSO मामलों का अधिक बैकलॉग है।


यह योजना 2 अक्टूबर 2019 को शुरू की गई थी। वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट कार्यरत हैं, जिनमें 399 विशेष POCSO अदालतें शामिल हैं। योजना की शुरुआत से अब तक 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।


इस योजना की शुरुआत आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 और 25 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की गई थी। पहले इसे एक वर्ष के लिए शुरू किया गया था और बाद में 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। अब इसे अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

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