नई दिल्ली। वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों के लिए निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की वापसी (आरओडीटीईपी) योजना को पांच साल बढ़ाने की मांग की है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह योजना 30 सितंबर को समाप्त होने वाली है। अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय इस मुद्दे पर व्यय विभाग के साथ चर्चा कर रहा है। आरओडीटीईपी (RoDTEP) योजना का पूरा नाम निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) है, जिसे भारत सरकार ने जनवरी 2021 में शुरू किया था। इस योजना के तहत निर्यातकों को वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में लगने वाले ऐसे करों, शुल्कों और उपकरों की वापसी का प्रावधान है जिनकी केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य व्यवस्था के तहत प्रतिपूर्ति नहीं की जाती है।
इस योजना के तहत मिलने वाली राशि 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत तक है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 18,232 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया था। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए योजना का बजट 10,000 करोड़ रुपये है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले साल के खर्च के आधार पर…हम इस व्यवस्था को लेकर व्यय विभाग के साथ पहले से ही चर्चा कर रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार इसकी समीक्षा कर रही है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इसमें विश्वसनीयता बनी रहे।’
