प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाने वालों पर साधा निशाना, कहा- नाराज फूफा

 


वडोदरा । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाने वालों पर मंगलवार को निशाना साधते हुए उन्हें एक बार फिर ‘‘नाराज फूफा’’ बताया। उन्होंने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद पिछले 12 वर्ष में देश की कार्यसंस्कृति बदल गई है। इस कार्यक्रम में उन्होंने 35,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में 2,800 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई गलियारा भी शामिल है, जिसे मोदी ने ‘‘21वीं सदी की ऐतिहासिक उपलब्धि’’ बताया।


पीएम मोदी ने गलियारा परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘नाराज फूफा जी कहेंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा?’’ उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘नाराज फूफा को अब काम मिल गया।’’


पीएम मोदी ने कहा, ‘‘2014 के बाद भारत ने 50,000 आधुनिक रेल कोच बनवाए लेकिन पिछली (कांग्रेस) सरकार 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बनवा सकी।’’


प्रधानमंत्री मोदी ने समर्पित माल ढुलाई गलियारे (पश्चिम) के तीन प्रमुख खंडों का उद्घाटन किया। यह गलियारा नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह को उत्तर प्रदेश के दादरी से जोड़ता है और इन खंडों के उद्घाटन के साथ परियोजना पूरी हो गई। उन्होंने कहा, ‘‘समर्पित माल ढुलाई गलियारे तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा हैं। इस आधुनिक माल ढुलाई नेटवर्क के कारण भारत में बदलाव की रफ्तार तेज हो रही है।’’


उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही पटरी पर चलना पड़ता था जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों की रफ्तार धीमी हो जाती थी लेकिन समर्पित माल ढुलाई गलियारे ने इस स्थिति को बदल दिया है।


पीएम मोदी ने कहा, ‘‘आपके आशीर्वाद से जब मैं 2014 में दिल्ली पहुंचा तो हमने इस परियोजना के काम में तेजी लानी शुरू कर दी। आज 2,800 किलोमीटर लंबे समर्पित माल ढुलाई गलियारे का काम पूरा हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि आज पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे देश के व्यापार और कारोबार की मुख्य रीढ़ बन रहे हैं।


पीएम मोदी ने कहा कि 2,800 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई गलियारा इस बात का प्रमाण है कि पिछले 12 वर्ष में देश की कार्यसंस्कृति किस तरह बदली है। उन्होंने कहा, ‘‘इस समर्पित माल ढुलाई गलियारे का विचार 2004 में सामने आया था। इस काम के लिए 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई लेकिन 2014 तक फाइलें एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहीं।’’


प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इन फाइलों की किस्मत में भी दुर्भाग्य से कोई समर्पित गलियारा नहीं था। फाइलें कहीं अटक जाती थीं, कहीं पड़ी रहती थीं और इधर-उधर भटकती रहती थीं।’’ उन्होंने राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पहल पर भी तंज कसते हुए कहा कि युवा सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे और ‘‘झूठ की गूंज’’ से गुमराह नहीं होंगे।

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