32 हजार से अधिक लोगों की जांच; 14,637 बच्चों को MR वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक

  

बालाघाट।  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक के जनजातीय क्षेत्रों में जुलाई के दूसरे सप्ताह में बुखार, बुखार के साथ चकत्ते और इससे संबंधित मौतों के मामले सामने आने के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने व्यापक जनस्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच, उपचार, टीकाकरण और दूरदराज के जनजातीय समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लगातार मजबूत किया गया है।


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान समन्वित रूप से वैज्ञानिक जांच और जनस्वास्थ्य उपायों को आगे बढ़ा रहे हैं। स्वास्थ्य टीमों ने शुरुआत से ही घर-घर जाकर मामलों की पहचान, मलेरिया जांच, नमूने संग्रह, चिकित्सीय प्रबंधन और गंभीर मरीजों को समय पर रेफर करने की कार्रवाई शुरू कर दी थी।


राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी, 12 अगस्त को NJORT की तैनाती


बदलती स्थिति की राष्ट्रीय स्तर पर लगातार समीक्षा की गई। बहु-विषयक प्रतिक्रिया को और मजबूत करने के लिए 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम (NJORT) को बालाघाट भेजा गया।


राष्ट्रीय प्रतिक्रिया में जनस्वास्थ्य निगरानी विशेषज्ञों, टीकाकरण प्रभाग, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम और आईसीएमआर की स्वतंत्र जांच टीम को शामिल किया गया है। इससे पहले 4 अगस्त को आयोजित राष्ट्रीय स्तर की वर्चुअल समीक्षा में महामारी विज्ञान की स्थिति, दर्ज मौतों, खसरा और मलेरिया से जुड़े निष्कर्षों, प्रयोगशाला जांच रणनीति, कीट विज्ञान संबंधी आकलन और रोकथाम उपायों की समीक्षा की गई थी।


तकनीकी विशेषज्ञों ने निगरानी और स्वास्थ्य हस्तक्षेपों का दायरा आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों तक बढ़ाने तथा दुर्गम गांवों और टोलों के लिए विस्तृत सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार करने की सलाह दी।


आईसीएमआर की टीमें कर रहीं वैज्ञानिक जांच


आईसीएमआर भी स्थिति की वैज्ञानिक जांच और तकनीकी आकलन में सक्रिय रूप से शामिल है। राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के तहत आईसीएमआर की स्वतंत्र जांच टीम के अलावा आईसीएमआर जबलपुर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राज्य सरकार को तकनीकी सहयोग दे रही हैं। जांच में चिकित्सीय आकलन, प्रयोगशाला परीक्षण, खसरा और मलेरिया निगरानी, मौतों की समीक्षा, कीट विज्ञान संबंधी अध्ययन और रोकथाम उपाय शामिल हैं।


दूरदराज के जनजातीय इलाकों में पहुंचीं मोबाइल मेडिकल यूनिट


क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने बिरसा और बैहर ब्लॉक में छह मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की हैं। ये यूनिट दूरदराज की बस्तियों में सीधे पहुंचकर बुखार की जांच, ओपीडी सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीबी और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, प्राथमिक निदान और दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। विशेष ध्यान जनजातीय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों यानी PVTG की उन बस्तियों पर दिया जा रहा है, जहां भौगोलिक दूरी और कठिन पहुंच के कारण स्वास्थ्य सेवाएं सीमित रही हैं।


निगरानी नेटवर्क को पहले तीन गांवों से बढ़ाकर अब लगभग 50 गांवों तक विस्तारित कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 10 से अधिक डॉक्टर और 10 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी लगातार स्क्रीनिंग और उपचार कार्य में जुटे हैं।

32,433 लोगों की जांच, 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया मैदानी स्तर पर चल रही व्यापक स्वास्थ्य कार्रवाई के तहत अब तक 32,433 लोगों की चिकित्सीय जांच की जा चुकी है। चिन्हित मरीजों में से 431 बच्चों को उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कराया गया।


इनमें से 379 बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 52 बच्चों का उपचार और निगरानी जारी है। विस्तारित स्क्रीनिंग और रेफरल व्यवस्था के जरिए दूरदराज की बस्तियों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों की समय पर पहचान सुनिश्चित की जा रही है।


14,637 बच्चों को खसरा-रूबेला वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक


प्रकोप-प्रतिक्रिया टीकाकरण अभियान के तहत 1 से 10 वर्ष आयु वर्ग के 14,637 बच्चों को खसरा-रूबेला यानी MR वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी गई है। यह खुराक बच्चों के पूर्व टीकाकरण की स्थिति की परवाह किए बिना प्रकोप के दौरान निर्धारित टीकाकरण दिशानिर्देशों के अनुरूप दी गई। रोकथाम के अन्य उपायों को भी तेज किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 600 से अधिक पेयजल स्रोतों को शुद्ध किया गया, जबकि 4,338 घरों में कीटनाशक छिड़काव पूरा किया गया है। प्रभावित और आसपास के इलाकों में फॉगिंग अभियान भी चलाया गया।


उपचार सुविधाओं को किया गया मजबूत


पीएचसी सोंगुड्डा सहित अन्य उपचार केंद्रों को अतिरिक्त बिस्तरों, दवाओं, चिकित्सा अधिकारियों, प्रयोगशाला सहायता और संक्रमण रोकथाम सुविधाओं से मजबूत किया गया है। कुंडेकासा समेत प्रभावित और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अस्थायी उपचार सुविधाएं और स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए गए हैं। कुंडेकासा में स्थापित अस्थायी अस्पताल जरूरतमंद मरीजों को उपचार उपलब्ध करा रहा है। साथ ही गंभीर मरीजों के लिए रेफरल और परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।


कुपोषण और बाल स्वास्थ्य पर विशेष फोकस


स्वास्थ्य कार्रवाई के दौरान बच्चों में मौजूद अन्य स्वास्थ्य कमजोरियों की भी व्यापक जांच की गई। स्क्रीनिंग में 7,711 बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण से ग्रस्त पाए गए, जिनमें से 518 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कर उपचार दिया गया।

इसके अलावा 13,406 बच्चों में दस्त और 274 बच्चों में गंभीर निमोनिया की पहचान कर उपचार किया गया। संभावित गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण वाले बच्चों को भी विशेष चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई गई।


राज्य के दस्तक 2026 अभियान के तहत लगभग 1.58 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है। साथ ही विटामिन-ए सप्लीमेंटेशन और अन्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों को भी तेज किया गया है।


पिछले सात दिनों में खसरे का कोई नया मामला नहीं


सतत निगरानी, सक्रिय रूप से मामलों की पहचान, त्वरित रेफरल और उपचार, प्रकोप-प्रतिक्रिया टीकाकरण, विटामिन-ए सप्लीमेंटेशन, वेक्टर नियंत्रण, सुरक्षित पेयजल और समुदाय की भागीदारी जैसे उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।


स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले सात दिनों में बालाघाट में खसरे का कोई नया मामला सामने नहीं आया है, जो स्थिति पर नियंत्रण की दिशा में उत्साहजनक संकेत माना जा रहा है।


मौतों की मामलेवार समीक्षा, किसी एक बीमारी को जिम्मेदार ठहराने से इनकार


सरकार ने दर्ज मौतों की मामलेवार और पूर्वव्यापी समीक्षा की है, जिसमें वर्बल ऑटोप्सी और उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड का अध्ययन शामिल है। अब तक उपलब्ध साक्ष्यों में खसरा, मलेरिया, खसरा-मलेरिया सह-संक्रमण, श्वसन संकट, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी विभिन्न चिकित्सीय स्थितियां सामने आई हैं।


कई शुरुआती मौतें घर पर या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले हुईं, जिसके कारण पर्याप्त चिकित्सा दस्तावेज और जांच नमूने उपलब्ध नहीं हो सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्यों के बिना इन मौतों को किसी एक रोगजनक या बीमारी से जोड़ना उचित नहीं होगा।


केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय और PVTG समुदायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।समन्वित स्वास्थ्य अभियान का उद्देश्य समय पर मामलों की पहचान, त्वरित उपचार, टीकाकरण, रोगों की रोकथाम और दुर्गम बस्तियों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

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