हैदराबाद । केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईआईसीटी) में 44.46 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले नए छात्रावास की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने चार अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) सुविधाओं का भी उद्घाटन किया और कहा कि कृषि अनुसंधान तथा उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण को गति देगी।
कृषि अनुसंधान और उद्योग साझेदारी पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान, अपशिष्ट-से-संपदा (वेस्ट-टू-वेल्थ) प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं और यही विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
सतत विनिर्माण को बताया भविष्य की जरूरत
सतत प्रसंस्करण प्लेटफॉर्म पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सतत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां रासायनिक और औषधि उद्योग का भविष्य हैं। इनसे सुरक्षा में सुधार, उत्पादकता में वृद्धि, उत्पाद की गुणवत्ता में एकरूपता और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी आती है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण प्रणाली अपनाने और प्रयोगशाला के नवाचारों को तेजी से व्यावसायिक तकनीकों में बदलने में मदद करेगी।
चक्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सस्टेनेबल इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्स (सस्टईसी) को भविष्य की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह भारत के चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट प्लास्टिक, बायोमास, कृषि अवशेष और औद्योगिक उप-उत्पादों को ईंधन, हाइड्रोजन, उन्नत सामग्री और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने वाली तकनीकें स्थिरता, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक मूल्य सृजन को एक साथ बढ़ावा देंगी। इससे नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
प्रयोगशाला से उद्योग तक पहुंचे नवाचार
उन्होंने कहा कि उद्घाटन की गई सभी चार अनुसंधान सुविधाओं का साझा उद्देश्य प्रयोगशाला अनुसंधान को औद्योगिक उपयोग से जोड़ना है। फ्लोरोकेमिकल्स, स्वच्छ विनिर्माण, पर्यावरण प्रौद्योगिकी और सतत इंजीनियरिंग से जुड़ी ये पहल स्टार्टअप्स, एमएसएमई, उद्यमियों और उद्योगों को स्वदेशी तकनीकों को अपनाने में सहयोग देंगी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक उत्कृष्टता का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वह रोजगार सृजित करे, उद्योग को मजबूत बनाए और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।
वैज्ञानिक प्रतिभा और आधुनिक अवसंरचना में निवेश जरूरी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-आईआईसीटी में हाल ही में लगभग 90 स्थायी कर्मियों, जिनमें करीब 70 वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं, की भर्ती का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रतिभा के साथ-साथ विश्वस्तरीय अनुसंधान अवसंरचना और गुणवत्तापूर्ण छात्रावास जैसी सुविधाएं भी युवा वैज्ञानिकों को नवाचार के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराती हैं।
वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व की दिशा में भारत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी पहलों के माध्यम से सरकार ऐसा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है, जहां अनुसंधान संस्थान, शिक्षण संस्थान, स्टार्टअप्स और उद्योग मिलकर वैश्विक स्तर की प्रौद्योगिकियां विकसित करें। उन्होंने वैज्ञानिकों से उद्योग जगत के साथ सहयोग बढ़ाने, युवा उद्यमियों का मार्गदर्शन करने और प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को बाजार तक पहुंचाने का आह्वान किया।
