भारत और पाकिस्तान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत? पिछले तीन महीनों में दो मीटिंग, जानकारी सामने आ रही है



नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के सत्ता में आने के बाद से पिछले 10-12 सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बहुत टेंशन वाले रहे हैं। पिछले साल पहलगाम में हुए टेररिस्ट अटैक और उसके बाद इंडियन आर्मी के शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए थे। इस बीच, भारत और पाकिस्तान की तरफ से आपसी रिश्ते फिर से ठीक करने की कोशिशें की गई हैं। इसी के तहत, पिछले तीन महीनों में दोनों देशों के रिप्रेजेंटेटिव दो बार बातचीत कर चुके हैं। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल को भी इन बातचीत की जानकारी है।


जबकि ऑपरेशन सिंदूर अपनी एक साल की एनिवर्सरी के करीब है, पिछले एक साल में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई ऑफिशियल बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, पिछले 3 महीनों में भारत और पाकिस्तान के पूर्व जनरल और रिटायर्ड डिप्लोमैट कम से कम दो बार मिल चुके हैं। इनमें से एक मीटिंग कतर में और दूसरी किसी दूसरे एशियाई देश की राजधानी में हुई थी। हालांकि, कहा जा रहा है कि ये मीटिंग बंद दरवाजों के पीछे होने वाली फॉर्मल बातचीत नहीं हैं। लेकिन क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच यह पहली बार बातचीत हुई है, इसलिए इसका ज़्यादा महत्व है।


इस बीच, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल के ऑफिस को भारत और पाकिस्तान के बीच बंद दरवाजों के पीछे चल रही इन बातचीत की जानकारी है। नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट को भी पाकिस्तान की तरफ से जताई गई इस इच्छा के बारे में बता दिया गया है। साथ ही, पर्दे के पीछे चल रही इन बातचीत को लेकर पॉलिटिकल लेवल पर कोई फैसला नहीं हुआ है।


हालांकि, कहा जा रहा है कि इन बातचीत के पीछे मुख्य वजह किसी भी हमले की स्थिति में पैदा होने वाले टेंशन को मैनेज करने का तरीका ढूंढना था। फिलहाल, दोनों देशों में ऐसे क्राइसिस मैनेजमेंट सिस्टम की कमी है। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, दोनों देशों के बीच बातचीत का एकमात्र ज़रिया दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हॉटलाइन थी। आज भी, दोनों देशों के डीजीएमओ हफ्ते में एक बार बातचीत करते हैं।

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