सुप्रीम कोर्ट का सभी हाईकोर्ट को निर्देश, हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला रिजर्व न रखें



-जमानत ऑर्डर तुरंत सुनाएं, 1 दिन से ज्यादा न रोकें

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोट्र्स को निर्देश दिया है कि किसी भी मामले का फैसला रिजर्व रखने के बाद उसे 3 महीने में सुना दिया जाए। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि फैसलों में देरी होने से जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। बेंच ने कहा कि जमानत याचिकाओं के आदेश भी उसी दिन सुनाए जाने चाहिए। अगर उन्हें फैसला रिजर्व रखा जाता है, तो उन्हें अगले दिन जरूर सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए। दरअसल, शुक्रवार को पिला पहन और झारखंड सरकार से जुड़ा एक मामला सीजेआई की बेंच में सुनवाई के लिए पहुंचा था। दावा किया गया कि कई हाईकोर्ट फैसले लंबे समय तक रिजर्व रखते हैं। लगातार हो रही देरी से निपटने के लिए बेंच ने ये निर्देश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट के 4 निर्देश

-जमानत याचिका पर आदेश उसी दिन सुनाया जाए

-अगर आदेश रिजर्व रखा गया है, तो अगले दिन तक अपलोड किया जाए

-बेल या सजा निलंबन का आदेश तुरंत जेल प्रशासन को भेजा जाए

-आरोपी या कैदी को संभव हो तो उसी दिन, नहीं तो अगले दिन तक रिहा किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग

सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढऩे से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया था कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाईकोर्ट में 63,63,406 मामले पेंडिंग थे।

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