पीएम मोदी की आवास योजना बनी ग्लोबल साउथ के लिए मॉडल

 


नई दिल्ली। भारत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के लिए चलाई जा रही आवास योजनाएं अब विकासशील देशों के समूह ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक उदाहरण बनती जा रही हैं। ये योजनाएं सामाजिक समावेशन, लैंगिक न्याय और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी हैं। 


‘सभी के लिए आवास’ को मानवाधिकार के नजरिए से देखा जा रहा


एशियाई न्यूज पोस्ट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार भारत के ‘सभी के लिए आवास’ अभियान को अब मानवाधिकार के नजरिए से भी देखा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल गरीब नागरिकों को घर उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें समानता, सामाजिक सुरक्षा और आत्मसम्मान प्रदान करना भी है। इस ढांचे में महिलाओं के नाम पर घर का स्वामित्व देना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


महिलाओं के स्वामित्व पर विशेष जोर


लेख में कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के साथ-साथ पीएमएवाई शहरी 2.0 और क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम यह दर्शाती हैं कि भारत की आवास नीति को समावेशन, लैंगिक समानता और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। महिलाओं के नाम पर घर का स्वामित्व उन्हें आश्रित नहीं, बल्कि अधिकार प्राप्त संपत्ति मालिक के रूप में पहचान देता है।


ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बने घर


ग्रामीण भारत में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पक्का घर केवल रहने की सुविधा नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सामाजिक भागीदारी का प्रतीक बन गया है। योजना के दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि घर के स्वामित्व में महिलाओं का नाम शामिल होना चाहिए। महिलाओं को घर की अकेली मालिक या पुरुष सदस्यों के साथ संयुक्त मालिक बनाया जा सकता है।

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