जंग का नतीजा? अब ई30 पेट्रोल! इथेनॉल ब्लेंड को 30 परसेंट तक बढ़ाने की मांग; क्रूड ऑयल इंपोर्ट पर बड़ी बचत



नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में युद्ध छिडऩे और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंड को 20' से बढ़ाकर 30 प्रतिशत (ई30) करे। इथेनॉल इंडस्ट्री ने देश की फ्यूल सिक्योरिटी को मजबूत करने और महंगे इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए यह अहम कदम उठाने की तैयारी दिखाई है।

एआईडीए की मुख्य मांगें

पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाकर 30' की जाए, ब्राजील की तरह 100' इथेनॉल पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाडिय़ों को बढ़ावा दिया जाए। पेट्रोल की तरह, डीजल में भी इथेनॉल ब्लेंडिंग की संभावना तलाशी जानी चाहिए, जिससे फ्यूल की लागत कम होगी। घरेलू और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए इथेनॉल-बेस्ड कुकिंग स्टोव को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

देश को इससे क्या फायदा होगा?

  • इम्पोर्ट कॉस्ट में बचत: इथेनॉल का हिस्सा बढ़ाने से क्रूड ऑयल इम्पोर्ट पर अरबों डॉलर बचेंगे।
  • एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन: क्योंकि इथेनॉल एक क्लीन फ्यूल है, इससे कार्बन एमिशन कम होगा और एयर पॉल्यूशन भी कम होगा।
  • किसानों की इनकम: इथेनॉल की बढ़ती डिमांड गन्ना और मक्का किसानों के लिए इनकम का एक बड़ा सोर्स होगी।

अभी की स्थिति

भारत ने पेट्रोल में 20' इथेनॉल ब्लेंडिंग (ई20) का टारगेट तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है। अभी, देश में अनुमानित 2,000 करोड़ लीटर इथेनॉल प्रोडक्शन कैपेसिटी है और 380 से ज़्यादा डिस्टिलरी चल रही हैं। नितिन गडकरी को लिखे एक लेटर में एआईडीए ने कहा कि बढ़ी हुई कैपेसिटी का इस्तेमाल करने के लिए अब ई30 पर शिफ्ट होना ज़रूरी है।

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