
नई दिल्ली। कई देशों ने मिडिल ईस्ट में ईरान की ओर से की जा रही कार्रवाई की घोर निंदा की और होर्मुज स्ट्रेट बंद करने को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। इसके साथ ही सभी देशों ने संयुक्त बयान जारी कर ईरान से हमले रोकने की अपील की। होर्मुज स्ट्रेट इलाके में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया के नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट में हालात को लेकर संयुक्त बयान जारी किया है।
संयुक्त बयान में कहा गया, "हम खाड़ी में बिना हथियार वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हालिया हमलों, तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और ईरानी सेना द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को असल में बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। हम बढ़ते संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता जताते हैं। हम ईरान से अपील करते हैं कि वह कमर्शियल शिपिंग के लिए स्ट्रेट को रोकने की अपनी धमकियों, माइन बिछाने, ड्रोन और मिसाइल हमलों और दूसरी कोशिशों को तुरंत बंद करे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करे।" बयान में आगे कहा गया कि नेविगेशन की आजादी अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी भी शामिल है।
ईरान की हरकतों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों, खासकर सबसे कमजोर लोगों पर पड़ेगा। यूएनएससी प्रस्ताव 2817 के मुताबिक, हम इस बात पर जोर देते हैं कि इंटरनेशनल शिपिंग में इस तरह की दखलअंदाजी और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन में रुकावट अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। इस बारे में हम तेल और गैस इंस्टॉलेशन समेत सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों पर तुरंत पूरी रोक लगाने की अपील करते हैं।