-जैश-ए-मोहम्मद के चीफ़ मसूद अज़हर का एक सनसनीखेज ऑडियो सामने आया है
नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन माने जाने वाले 'आईसी-814' प्लेन हाईजैकिंग की घटना को भले ही कई साल बीत गए हों, लेकिन उसके ज़ख्म अभी भी ताज़ा हैं। अब इसी मामले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद के चीफ़ मसूद अज़हर का एक सनसनीखेज ऑडियो सामने आया है। इस ऑडियो में उसने बताया है कि कैसे उसे भारतीय जेल से रिहा किया गया और कैसे बिना किसी जांच के उसे प्लेन में बिठा दिया गया।
"दिल्ली से अधिकारी मुझे गिरफ्तार करने आए थे
मसूद अज़हर ने इस ऑडियो में दावा किया है कि, मेरी रिहाई से पहले, दिल्ली से कुछ बड़े अधिकारी मुझसे मिलने आए थे। वे देखना चाहते थे कि मेरे अंदर जिहाद की भावना मर गई है या अभी भी जि़ंदा है। उन्होंने मुझसे पूछा, क्या तुम्हारे रिहा होने से कश्मीर में जिहाद खत्म हो जाएगा? मैंने उनसे साफ़-साफ़ कहा कि यह जंग 50 साल बाद भी खत्म नहीं होगी।
जसवंत सिंह का जि़क्र और उनकी रिहाई का पल
आतंकवादी ने उस समय के विदेश मंत्री जसवंत सिंह का भी जि़क्र किया। वह कहता है, हाईजैकिंग के बाद, जसवंत सिंह 70 घंटे तक लगातार जागे रहे। अधिकारी मुझसे कहते थे कि तुम्हारी कब्र इसी मिट्टी में खोदी जाएगी। लेकिन अल्लाह की मजऱ्ी कुछ और थी। वही अधिकारी बाद में आए और मुझसे कहा कि मौलाना, तुम्हें जाना होगा।
कोई चेकिंग नहीं, कोई बोर्डिंग नहीं... सिफऱ् दहशत थी
अपनी रिहाई के समय के हालात बताते हुए मसूद ने कहा, मुझे प्लेन में ले जाने से पहले कोई बोर्डिंग प्रोसेस नहीं हुआ। मेरे पास न वीज़ा था, न पासपोर्ट, न इमिग्रेशन चेक। उन्होंने मेरी तलाशी लेने की भी हिम्मत नहीं की। वे इतने डरे हुए थे कि उन्होंने बस मेरी आँखों पर पट्टी बाँध दी और हथकड़ी लगाकर मुझे प्लेन में ले गए।
क्या था मामला?
31 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी -814 को आतंकवादियों ने तब हाईजैक कर लिया था, जब वह काठमांडू से दिल्ली जा रही थी। प्लेन को अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया। प्लेन में सवार 180 यात्रियों की जान बचाने के लिए भारत सरकार को तीन खतरनाक आतंकवादियों मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा करना पड़ा। रिहाई के बाद मसूद अजहर पाकिस्तान गया और जैश-ए-मोहम्मद संगठन बनाया और भारत पर बड़े आतंकवादी हमले किए, जिसमें संसद पर हमला और पुलवामा हमला शामिल है।
