-रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े बिल को ट्रम्प की मंजूरी, अगले हफ्ते संसद में वोटिंग
वॉशिंगटन डीसी । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों खासकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि उन्होंने बुधवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति से बातचीत की, जिसमें ट्रम्प ने संसद में बिल को पेश करने के लिए हरी झंडी दे दी। यह बिल पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था। इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है। बिल का नाम 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025 है। इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को युद्ध लडऩे में मदद मिल रही है।
क्यों लाया गया एसआरए एक्ट
रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए जारी किए गए ट्रम्प के कार्यकारी आदेशों को इस एक्ट के जरिए कानून में बदला जाएगा। भविष्य में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले फैसले से इन प्रतिबंधों को नहीं हटा सकता और न ही उनमें कटौती कर सकेगा। अगर किसी तरह की छूट या राहत देनी भी हो, तो उसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। बिल में राष्ट्रपति को विशेष छूट (प्रेसिडेंशियल वेवर) देने का भी प्रावधान है, ताकि डोनाल्ड ट्रम्प को रूस पर दबाव बनाने की ज्यादा ताकत मिल सके।
बिल को सीनेट में 80' सांसदों का समर्थन
रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाला यह बिल एक बाइपार्टिसन यानी द्विदलीय बिल है। यह बिल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, इस बिल के अभी 85 सह-प्रायोजक (को-स्पॉन्सर) हैं, यानी सीनेट के 80 प्रतिशत से ज्यादा सांसद इसके समर्थन में हैं।
रूसी तेल की वजह से भारत पर पहले से 25% टैरिफ
अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर पर पहले से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया हुआ है। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो दिल्ली के लिए नई मुश्किलें लेकर आ सकता है। अब तक भारत पर कुल 50% टैरिफ लग चुका है। इसके चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है, जिसका असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत भी चल रही है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है।
