शनिवार, 22 फ़रवरी 2020

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: प्राथमिक शालाओं में 27 फरवरी तक होंगे आयोजन

रायपुर। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन प्रति वर्ष 21 फरवरी को किया जाता है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा इस वर्ष बच्चों को स्थानीय भाषा में अध्यापन के लिए घोषणा की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्य डाइट और जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा को अपने जिलों की सभी प्राथमिक शालाओं में 27 फरवरी तक आयोजन करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश के परिपालन में जिले की सभी प्राथमिक शालाओ में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के संबंध में आयोजन किए जा रहे है। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के संबंध में स्कूलों में आयोजन से बच्चों के लिए यह बहुत अच्छी बात है कि वे प्रारंभिक कक्षाओं में अपनी भाषा में सीखने का प्रयास कर रहे हैं। इससे बच्चों को कक्षा में बताई जा रही बाते समझ में जल्दी आएगी। सुकमा जिले के तोंगपाल शासकीय हाई स्कूल पोटाकेबिन के विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के कार्यक्रम में निबंध, चर्चा, लोकगीत, मातृभाषा के बारे में बताया गया। इसी जिले के ग्राम छिंदगढ़ की केजीबी स्कूल के बच्चों ने वाचन, स्थानीय भाषा में गीत-कविताओं का पाठ किया। कन्या आश्रम भण्डाररास में समुदाय से बड़े बुजुर्गो को आमंत्रित कर बच्चों को स्थानीय भाषा में कहानी सुनाई गई। इसी प्रकार राज्य के अन्य स्कूलों में भी आयोजन किए जा रहे हैं।
आयोजन के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि बच्चों के घर की भाषा की पहचान कर उन्हें अध्यापन के लिए तैयार करना है। अपने-अपने क्षेत्र में बच्चों की भाषा सिखने के लिए उस भाषा के जानकार के नेतृत्व में सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार बच्चों को भाषा सीखने की दिशा में प्रयास कर आगामी सत्र प्रारंभ होने के पूर्व भाषा सीखने के लिए ठोस कार्यक्रम प्रारंभ करना है। बच्चों को उनकी भाषा में वर्णमाला चार्ट तैयार कर सिखाया जाए। आयोजन के दौरन समुदाय से बड़े बुजुर्गो को आमंत्रित कर बच्चों को इस सप्ताह में प्रति दिन स्थानीय भाषा में कहानी सुनाई जाए। मुस्कान पुस्तकालय में उपलब्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग कर प्रति दिन इनका वाचन किया जाए। बड़ी कक्षाओं, स्थानीय समुदाए के सहयोग से बड़ी पुस्तक तैयार कर वाचन किया जाए। स्थानीय भाषा में गीत-कविताओं, विभिन्न लोक कलाओ से परिचय और स्थानीय कार्यक्रम का आयोजन के साथ ही शाला अनुदान की राशी से स्थानीय भाषा में सामग्री डिजाइन कर प्रिंट-रिच वातावरण तैयार किया जाए। स्थानीय भाषा में पठन कार्य तैयार कर उनका नियमित उपयोग करवाना सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

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