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विज्ञान एवं तकनीकी विकास तथा भू-विज्ञान और जल संसाधन विषय पर हुआ व्याख्यान

46वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी 

रायपुर। 46वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित एवं पर्यावरण प्रदर्शनी 2019 में जीवन की चुनौतियों के लिए वैज्ञानिक समाधान के तहत विज्ञान एवं तकनीकी विकास तथा भू-विज्ञान और जल संसाधन विषय पर वैज्ञानिक व्याख्यान हुआ।     राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थित बीटीआई मैदान में बच्चों के लिए आयोजित इस प्रदर्शनी के अंतिम दिन पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति एवं प्राध्यापक प्रोफेसर एस.के. पाण्डेय द्वारा ''साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी फॉर इनक्लूसिव ग्रोथÓÓ पर व्याख्यान दिया गया।
    प्रो. पाण्डेय ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि विज्ञान हमारे जीवन का हिस्सा हैं और जवाहरलाल नेहरू जी का सपना था कि हम अपने जीवन में विज्ञान को हिस्सा बनाएं। हम पहले क्या थे और आज क्या हैं। इसकी तुलना हमें करना चाहिए। हमारी इस उन्नति का श्रेय केवल विज्ञान और तकनीकी को जाता है। विज्ञान क्या है? ज्ञान के क्रमबद्ध विकास को विज्ञान कहते हैं। किसी विषय पर ज्ञान इक_ा करना विज्ञान है। संपूर्ण ब्रम्हाण्ड में सबसे बुद्धिजीवी प्राणी मनुष्य है अत: मनुष्य का दायित्व है कि वह इसे समझे और अपनी आने वाली पीढ़ी को इसे बताए कि कोई घटना होती है तो क्यों और कैसे होती है। सभी चीजों के पीछे विज्ञान छिपा है और इस रहस्य को हमें ढूंढना है। यह किसी देश विशेष का नहीं है, बल्कि डेमोक्रेटिक, ऑब्जेक्टिव, सेल्फ-रेगुलेटिंग और ग्लोबल है। इसमें सवाल का उत्तर ढूंढते हैं और इसके लिए प्रयोग करते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि हम केवल एक हल प्राप्त कर संतुष्ट हो जाएं। इस हल में अनेक प्रश्न होते हैं और प्रत्येक का उत्तर हमें ज्ञात करना होता है। यह अनंत काल तक चलने वाली प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में जिसका हल हम नहीं ढूंढ पाते उसे अगली पीढ़ी के लिए छोड़ देते हैं।
    टेक्नोलॉजी का अर्थ है विज्ञान का उपयोग। टेक्नोलॉजी की कल्पना विज्ञान के बिना नहीं की जा सकती। प्रत्येक के पीछे वैज्ञानिक कहानी है जिसे हमें बच्चों को बताना चाहिए, ताकि उनमें क्रियात्मकता आए और वे खोज के लिए तैयार हों। इसका लाभ मानव समाज को होना चाहिए। जीवन के अलग-अलग क्षेत्र में जैसे-कृषि, चिकित्सा, पेयजल आदि का आधार विज्ञान ही है, जिसे हमें नहीं भूलना चाहिए। मनुष्य की जरूरत जो है जैसे-गरीबी में व्यक्ति नहीं जानता कि विज्ञान क्या है। अत: इस पर कार्य होना चाहिए। पर्यावरण का उपयोग सही रूप में करना चाहिए।
    कार्यक्रम में द्वितीय प्रवक्ता प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष भूविज्ञान विभाग पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर डॉ. निनाद बोधनकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम केवल भौतिक, रसायन, गणित, जीवविज्ञान की बात करते हैं, लेकिन हमें इसके साथ जल को भी जोडऩा चाहिए। पानी में भौतिक, रसायन आदि हैं। पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जिसमें पानी पाया जाता है, लेकिन ऐसा क्या है कि पृथ्वी में ही पानी पाया जाता है। पानी 97 प्रतिशत उपलब्ध है जिसमें 3 प्रतिशत शुद्ध जल है। ग्लेशियर को लिया जाए तब 68 प्रतिशत पानी है। अत: पानी ठोस, द्रव और गैस तीनों रूप में विद्यमान है। यहां भौतिकी दिखाई देता है। यह समुद्र में वाष्पन द्वारा बादल रूप में बदलता है, जो वर्षा के रूप में प्राप्त होता है। पानी हिम पर्वत क्षेत्र में ठोस रूप में विद्यमान रहता है। समुद्र का जल खारा है, लेकिन कैसे हुआ यह हमें भौतिक विज्ञान बताता है। जब से पृथ्वी की उत्पत्ति हुई है तब से पानी की मात्रा उतनी ही है न यह घटी है न ही बढ़ी है। मौसम परिवर्तन के पीछे का कारण पृथ्वी के घूर्णन है। सूर्य पृथ्वी के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव डाल रही है, जिससे वाष्पन हो रहा है। यह बादल के रूप में रहता है जो वर्षा के रूप में जमीन में आता है जिससे विभिन्न तत्व इसमें मिल जाते हैं, जिससे इसकी रसायन बदल जाती है। पानी की गुणवत्ता बदल जाती है। पानी की समस्या औद्योगीकरण के कारण है। उपलब्ध पानी में कहीं आयरन तो कहीं कैल्शियम की मात्रा ज्यादा है। यह शोध का विषय है कि इसकी मात्रा सीमित से ज्यादा है, जो मनुष्य के शरीर के लिए हानिकारक है, इसलिए हमें नुकसान उठाना नहीं पड़े।
    डॉ. बोधनकर ने कहा कि पूर्व की बात करें तो गैलिलियों ने टेलीस्कोप का अविष्कार किया, जिससे हम तारे को देख पाए। ब्रम्हाण्ड से जुड़ी कई घटनाएं वैज्ञानिकों ने बताई है, जिससे हम इसे समझ पाएं एवं पृथ्वी, आकाशगंगा, मिल्कीवे आदि को समझ पाए। लोग कहते हैं कि शनि ग्रह को नहीं देखना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक अद्भुत ग्रह है जिसका आनंद लेना चाहिए। आज हम चंद्रयान के द्वारा चांद पर पहुंच चुके हैं। इसकी सतह पर क्या है यह हमें जानना चाहिए। कोई क्षुद्रग्रह जीवन का किस प्रकार नुकसान कर सकता है। यह उसकी आकृति पर निर्भर करता है और इसे भी जानना आवश्यक है। हमारा सौर परिवार मिल्की-वे के चारों ओर घूम रहा है और सभी मिल्कीवे एक-दूसरे से दूर जा रही है। हमारी आकाशगंगा में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन है। अन्य ग्रहों में जीवन नहीं है। हम ब्रम्हाण्ड के आखिरी छोर पर खड़े हैं। हमारी स्थिति तिनके के समान है। ब्रम्हाण्ड के रहस्यों को समझने के लिए भागीदारी आवश्यक है। देश में अंतरिक्ष विज्ञान पर काम हो रहा है। पुराने समय का कार्य अब बढ़ गया है और हम चंद्रयान तक पहुंच चुके हैं। कृषि, चिकित्सा, संचार आदि में इसरो छाया है। इसके बिना इन सबकी कल्पना नहीं की जा सकती। सूर्य 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व से ऊर्जा का निर्माण कर रहा है और ऊर्जा संकट की स्थिति से निपटने के लिए हमें यही ऊर्जा बनानी है, जिसके लिए उन्होंने बच्चों का आव्हान किया। विज्ञान में जितना ज्यादा योगदान दे सकेंगे वह हमारी पीढ़ी के लिए अच्छा होगा। 

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