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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: दहेज उत्पीडऩ की कहीं भी हो सकती है शिकायत


नई दिल्ली । चीफ  जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली 3 जजों की बेंच ने 498ए पर फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अब दहेज उत्पीडऩ के चलते पति का घर या ससुराल छोडऩेे वाली महिला के लिए उसी शहर में शिकायत दर्ज करवाना जरूरी नहीं है। इस मसले पर लंबे समय से जारी कानूनी अस्पष्टता सुप्रीम कोर्ट ने दूर करते हुए कहा है कि महिला अपने माता-पिता के शहर या जहां भी वो रह रही है, वहां शिकायत दर्ज करवा सकती है। करीब 7 साल से मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। 2012 में 2 जजों की बेंच ने इस मसले को महत्वपूर्ण बताते हुए 3 जजों की बेंच को भेजा था. अब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली 3 जजों की बेंच ने फैसला दिया है। इस मसले पर विवाद इसलिए था क्योंकि ब्तच्ब् के प्रावधानों के तहत किसी मामले की एफआईआर वहीं दर्ज होती है, जहां घटना हुई है। अगर कोई अपराध एक से ज्यादा जगह पर हुआ है, तो उनमें से किसी भी एक जगह पर शिकायत दर्ज हो सकती है। ये मसला सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचा जब दहेज उत्पीडऩ के मामलों में अलग-अलग हाई कोर्ट ने अलग फैसले दिए। कुछ मामलों में हाई कोर्ट ने महिला की तरफ से पिता के शहर में दर्ज करवाई गई शिकायत को सही ठहराया। जबकि, कुछ मामलों में कहा कि किसी और जगह हुए अपराध पर दूसरे शहर की कोर्ट संज्ञान नहीं ले सकती।
अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि क्रूरता और दहेज प्रताडऩा से परेशान होकर ससुराल छोडऩे वाली महिला को उसी शहर में आकर मुकदमा दर्ज करवाने को मजबूर नहीं किया जा सकता. महिला ने जहां भी शरण ली हो, वहां शिकायत दर्ज करवा सकती है। मामले के तथ्यों के हिसाब से अगर उस शहर की अदालत उचित समझे तो संज्ञान ले सकती है।  

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