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’’नरवा गरूवा घुरवा अउ बारी’’ की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं हेटकापा के ग्रामीण


  • श्रमदान और सरकारी मदद से 8 एकड़ में बना गौठान
  • कलेक्टर ने ग्रामीणों की सोच और मेहनत को सराहा
जशपुरनगर । छत्तीसगढ़ की नई सरकार की परिकल्पना  ’’नवरा, गरूवा, घुरवा अउ बारी-ऐला बचना हे संगवारी’’ की परिकल्पना को हेठकापा के ग्रामीणों ने अपनी सोच, लगन मेहनत और सरकारी मदद से साकार कर दिया है। हेठकापा, जषपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड का गांव है। यह गांव पहाड़ियों की गोद में बसा है। इस  गांव में 412 परिवार निवासरत है। यह गांव, पंचायत का मुख्यालय भी है। इसका आश्रित ग्राम उपरकापा में जलसंरक्षण, नवरा (नाला) के जल का सदुपयोग, और बाडी विकास का काम काबिले तारीफ है।
कलेक्टर श्री निलेष कुमार महादेव क्षीरसागर आज हेडकापा एवं उपरकापा का दौरा कर वहां ’’नवरा गरूवा घुरवा अउ बारी’’ कार्यक्रम के तहत् पषुधन संरक्षण और संवर्धन के लिए 8 एकड़ रकबे में विकसित गौठान एवं चारागाह का मुआयना किया। कलेक्टर ने हेठकापा के ग्रामीणों के प्रयास की सराहना की और कहां कि आप सब ने छत्तीसगढ़ सरकार की मंषा को चरितार्थ कर दिखाया है। कलेक्टर ने हेठकापा और उपरकापा में शासन के सभी विभागों की योजनाओं (कन्वरजेन्स) के माध्यम से इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हर सम्भव सहयोग देने की बात कही।  कलेक्टर ने इस दौरान स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं से भी चर्चा की और उन्हें सब्जी और फलदार पौधे लगाने की समझाईष दी। उन्होनंे कहा सब्जी-भाजी की खेती करने वाले महिला स्व-सहायता समूह को हाइब्रिड बीज, खाद देने के साथ ही उसके मार्केटिंग की व्यवस्था भी प्रशासन करेगा।
        हेठकापा की सरपंच अम्ब्रेला बाई ने बताया कि गांव में गौठान बनाने के लिए पहाड़ी के तलहटी में 8 एकड़ जमीन सभी की सहमति से चिन्हित की गई। यहां गौठान बनाने के लिए श्रमदान करके साफ-सफाई की गई। जनपद पंचायत, कृषि, पषुपालन अन्य विभाग की अधिकारियों के मागदर्षन ने गौठान विकसित करने के साथ ही पषुओं के चारे-पानी के लिए 12 नग नांद एवं 4 पेयजल टांका बनाया है। पषुओं को चराने के लिए 7 चरवाहे रखे गए है। इस गौठान में नाडेप और वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करने के लिए टांके बनाए गए है। मनरेगा से गौठान की फेसिंग 5.50 लाख रुपए की लागत से कराया गया हैं गौठान से लगी 3 एकड़ भूमि जिसे हेठाकपा के निवासी परसारी , मिलन, झूलन, भुनेष्वर ने स्वेच्छा से 3 साल के लिए दान में दिया हैं। इस भूमि मंे पषुओं के चारा के लिए नेपियर घास लगाए जाने का काम चल रहा है। कलेक्टर ने जमीन दान देने वाले ग्रामीणों की तारीफ की। उन्होनंे नेपियर घास के साथ खेत की मेड आसपास की रिक्त भूमि पर लीची तथा अन्य फलदार पौधे लगाए जाने की समझाईष देते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आमदनी हासिल हो सकेगी।
        कलेक्टर ने कहा कि जल संवर्धन, पषुसंवर्धन और बारी विकास  के मामले में हेठकापा गांव जषपुर जिले का ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य का अग्रणी गांव है। यह गांव नरवा गरूवा घुरवा अउ वारी विकास कार्यक्रम का अलमबरदार गांव बन गया है। इस गौठान का निर्माण एवं विकास, गोपाल चारागाह समिति की देखरेख में हो रहा है। यहां फिलहाल 300 पषुधन का रखरखाव हो रहा है।
स्वावलंबन की राह पर विनोद
  हेठकापा गांव के विनोद केरकेट्टा ने अपनी लगन और मेहनत से पषुपालन और दुग्ध उत्पादन को अपने जीवन-यापन का जरिया बनाकर अन्य युवाओं के लिए पे्ररणास्त्रोत बन गए है। 30 वर्षीय श्री केरकेटटा ने अपने गांव में पषुधन संरक्षण और संवर्धन के कार्य से प्रेरित होकर गाय पालन का काम लगभग एक वर्ष पूर्व शुरू किया। आज उनके पास 7 दुधारू गायें हैं, जिससे रोजना औसतन 30 लीटर दूध होता है। जिसे वह अपने गांव सहित गोरिया कुनकुरी में विक्रय करते है। श्री केरकेट्टा ने बताया कि इससे उन्हें हर माह 12-15 हजार रुपए की आमदनी होने लगी है। गाय पालन के इस काम को आगे बढ़ाने की मंषा है। वह गायों के लिए हरे चारे की व्यवस्था बरसिंग और नेपियर घास लगाकर करने की दिषा में प्रयासरत है। गायपालन के साथ-साथ वह मछलीपालन भी कर रहे है। अपने स्वयं की भूमि में 2 डबरी (तालाब) का निर्माण कराकर मछली पालन कर रहे श्री केरकेट्टा ने बताया कि बीते 4 माह में वह एक क्विंटल से अधिक मछली का उत्पादन किया है।
बारी विकास के पर्याय बने फत्तेष्वर
       हेठकापा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम उपरकापा के किसान श्री फत्तेष्वर चैहान ने अपने घर के पिछले हिस्से में लगभग सवा एकड़ में शानदार बारी (बाड़ी) विकसित की है। फत्तेष्वर चैहान की बाड़ी में आलू, पपीता, चना, लहसुन, मूली, मुनगा, प्याज, मूंगफली, के साथ -साथ पषुओं के हरे चारे की व्यवस्था के लिए बरसिंग लगाया है। कलेक्टर श्री निलेष कुमार महादेव क्षीरसागर ने फत्तेष्वर चैहान की बाड़ी का मुआयना किया और उनके द्वारा विकसित बेहतरीन बाड़ी को एक मॉडल बताया। कलेक्टर ने कहा कि प्रदेष सरकार कि यही मंषा है कि ग्रामीणजन बाड़ी के जरिए सब्जी भांजी एवं फल उत्पादन करें और आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनें। उन्हें सब्जी भांजी बाजार से न खरीदना पड़े। किसान फत्तेष्वर चैहान ने अपने बाड़ी एवं खेतों की सिंचाई नाले के जल से विद्युत पंप के जरिए करते है। उपरकापा गांव में जल संरक्षण के लिए मनरेगा से 9 लाख 65 हजार रुपए की लागत से डबरी का निर्माण भी कराया गया है।
स्व सहायता की समूह की महिलाएं करेंगी सब्जी की खेती
       डपरकापा गांव में महिलाओं के 10 स्व सहायता समूह सब्जी की खेती करने की मंषा सजोए हुए है। कलेक्टर श्री क्षीरसागर ने आज अपने भ्रमण के दौरान उपरकापा गांव की महिलाओं से उनके समूह की गतिविधियों एवं स्वावलंबन की दिषा में किए जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से चर्चा की। महिलाओं ने सामूहिक रूप से सब्जी की खेती करने की मंषा जताई कलेक्टर ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को महिला स्व सहायता समूह को इसके लिए प्रषिक्षित किए जाने के साथ ही उन्हें हाईब्रिड सब्जी बीज, खाद आदि का प्रबंध निःषुल्क किए जाने के निर्देष दिए। कलेक्टर ने नाबार्ड के बाड़ी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत सिंचाई का भी प्रबंध सुनिष्चित करने की बात कही। हेठकापा, उपरकापा गांव जल ग्रहण मिषन की परियोजना आईडब्ल्यू एमपी 15 के अंतर्गत आताहै। यहां जल संरक्षण के साथ ही आजीविका संवर्धन के अंतर्गत फलदार पौधों की खेती भी कर रहे है। उपरकापा के बदरूद्दीन ने डेढ़ एकड़ रकबे में पपीते की खेती की है। इस दौरान एसडीएम श्री आर.एन. पाण्डे, जनपद पंचायत कुनकुरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, कृषि विभाग के एडीओ श्री रवि रंजन साहू एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 

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