ISRO आज लॉन्च करेगा GSAT-7A, वायुसेना को होगा फायदा



चेन्नई । भारत के भूस्थैतिक संचार उपग्रह जीसैट-7ए को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ11 से प्रक्षेपित करने के लिए 26 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गई। 2,250 किलोग्राम वजनी जीसैट-7ए उपग्रह को लेकर जाने वाले प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ11 आज शाम 4 बजकर 10 मिनट पर यहां से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट के दूसरे लांच पैड से प्रक्षेपित किया जाएगा। जीसैट-7ए का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया है और इसका जीवन 8 साल है। यह भारतीय क्षेत्र में केयू-बैंड के उपयोगकर्त्ताओं को संचार क्षमताएं मुहैया कराएगा। वहीं भारतीय वायुसेना के लिए यह बहुत खास है क्योंकि इससे नेटवर्क आधारित वायुसेना की लड़ने की क्षमता में कई गुणा ज्यादा बढ़ोतरी होगी।


  • इस सैटेलाइट से ग्राउंड रडार स्टेशन, एयरबेस और AWACS एयरक्राफ्ट को इंटरलिंक करने में काफी मदद मिलेगी।
  • एयरफोर्स के ग्लोबल ऑपरेशन को भी बड़ा पुश मिलेगा।
  • इससे न सिर्फ एयरबेस इंटरलिंक बढ़ेगा बल्कि ड्रोन ऑपरेशन, मानवरहित एरियल व्हीकल (UAV) की ताकत भी बढ़ेगी।
जीएसएलवी एफ-11 जीसैट-7ए को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट (जीटीओ) में छोड़ेगा और उसे आनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए अंतिम भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। जीएसएलवी-एफ11 इसरो की चौथी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। उल्लेखनीय है कि Gsat-7A से पहले इसरो Gsat-7 सैटलाइट जिसे 'रुक्मिणि' के नाम से जाना जाता है, को लॉन्च कर चुका है। इसे 29 सितंबर, 2013 में लॉन्च किया गया था। Gsat-7 सैटलाइट भी भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया था।