पंजाब रेल हादसा: 70 लोगों को मौत के घाट उतारने वाली ट्रेन के ड्राइवर ने दी सफाई

नई दिल्ली। पंजाब में खुशियों के त्योहार विजयादशमी पर शुक्रवार देर शाम उस समय मातम पसर गया, जब अमृतसर में रेलगाड़ी की चपेट में आने से लगभग 70 लोगों की मौत हो गई और लगभग 40 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा जोड़ा फाटक के निकट हुआ, जब रेललाइन के निकट विजयादशमी पर्व पर रावण का पुतला जलाया जा रहा था। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद अब रेल ड्राइवर की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। ड्राइवर ने कहा कि रावण जलने की वजह से आसपास काफी धुआं था, घटनास्थल पर रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उसे कुछ दिखाई नहीं दिया। रेल अधिकारी का कहना है कि ट्रेन भी घुमावदार मोड़ पर थी, जिसकी वजह से ड्राइवर कुछ भी देखने में असमर्थ था। हालांकि, अभी तक रेल ड्राइवर की पहचान को सार्वजनिक नहीं किया गया है। 
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घटनास्थल पर मंजर यह था कि मात्र पांच सेकंड से भी कम समय में वहां अनेक लोग रेलगाड़ी के नीचे आकर कट गए और अनेक घायल हो गए। पटरी और इसके आसपास लाशों का अंबार लग गया। जमीन खून से सन गई। किसी का सिर तो किसी का धड़, बाजु और टांगें इधर-उधर बिखरे हुए थे। इस हादसे का ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शिकार बने। कम से कम 50 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कइयों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा। करीब 70 लोगों का यहां सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इनमें से अनेक जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

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डॉक्टरों के अनुसार, कम से कम 40 लोगों की हालत बेहद गंभीर है। इनमें से अनेक अंगहीन हो गए हैं। प्रशासन ने अभी तक मृतकों की संख्या की कोई पुष्टि नहीं की है। घटनास्थल पर पड़े चीथड़ों से मृतकों की सही संख्या का आकलन करना मुश्किल हो रहा है। घटनास्थल पर घायलों और परिजनों की चीत्कार सुन कर वहां यह वीभत्स दृश्य देखने वाले हर किसी का दिल दहल गया। मृतकों में ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जाते हैं। बताया जाता है कि विजयदशमी पर्व पर वहां लोगों को रेल पटरी से हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन और रेलवे की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। यह भी बताया जाता है कि इस समारोह के लिये कोई अनुमति नहीं ली गई थी जिसकी फिलहाल जांच चल रही है।

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