नई दिल्ली। अमेरिका के मिलवॉकी में 2 अक्टूबर को आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन दिवस पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वैश्विक व्यापार में विकृतियों को दूर करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) के अनुरूप नियम-आधारित और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता एवं उत्पादन, सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा।
अतिरिक्त क्षमता पर WTO के अनुरूप उपायों की वकालत
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की घरेलू मांग पर आधारित है। भारत डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण करते हुए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है।
डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण पर जताई सहमति
गोयल ने कहा कि भारत कई सदस्य देशों की इस चिंता से सहमत है कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाला समर्थन डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण को बढ़ावा दे सकता है। ऐसी चिंताओं के समाधान के लिए WTO के अनुरूप उपाय उपलब्ध हैं, जिनमें साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन एंटी-डंपिंग तथा काउंटरवेलिंग ड्यूटी शामिल हैं।
उत्पादन के संकेंद्रण और सब्सिडी पर स्पष्ट रुख
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित होने पर व्यापार विकृतियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसका इस्तेमाल WTO नियमों से बाहर के उपायों के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही, समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर नहीं डाला जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें औद्योगीकरण के लिए नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखने की जरूरत है।
MFN सिद्धांत को बनाए रखने पर जोर
सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत को अद्यतन करने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि जी20 सदस्यों के साथ भारत का व्यापार पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित व्यापार प्रणाली पर निर्भर करता है। उन्होंने MFN सिद्धांत को इस व्यवस्था की प्रमुख गारंटी बताते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों तक सभी के लिए समान शर्तें लागू हों।
WTO में आम सहमति को बताया महत्वपूर्ण
गोयल ने WTO में आम सहमति को सर्वोपरि बताते हुए विकासशील देशों के लिए विशेष एवं भिन्न व्यवहार (Special and Differential Treatment) बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को विकसित देशों के साथ बराबरी की स्थिति तक पहुंचने में मदद मिलती है। उन्होंने WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने का भी आह्वान किया।
जबरन श्रम के उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जबरन श्रम पर रोक लगाता है और इसे सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से लागू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कन्वेंशन 29 और 105 की पुष्टि की है तथा जुलाई 2026 में जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया।
