चमका हिंदुस्तान हमारा!; न्यूक्लियर एनर्जी के फील्ड में भारत का 'करिश्मा!



-रूस के बाद भारत दूसरा देश बन गया है, 400 साल से चल रहा तनाव खत्म हो जाएगा

नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में न्यूक्लियर पावर प्लांट ने हाल ही में 'क्रिटिकैलिटी' (क्रांतिकारी) हासिल करके भारत के एनर्जी सेक्टर में एक नया इतिहास रच दिया है। खास बात यह है कि अगर भारत का न्यूक्लियर पावर प्रोग्राम इसी रफ्तार से चलता रहा, तो भारत को इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसकी अहमियत यह है कि अब भारत जल्द ही पारंपरिक फॉसिल फ्यूल पर निर्भर रहने के बजाय क्लीन और रिन्यूएबल एनर्जी बना सकेगा।

क्या यही इस न्यूक्लियर पावर प्लांट की खासियत है? -

कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत का पहला देसी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्रोजेक्ट है। 500 मेगावाट कैपेसिटी वाले इस एडवांस्ड रिएक्टर को इंदिरा गांधी सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च ने डिज़ाइन किया है और भविनी ने इसे बनाया है। खास बात यह है कि 200 से ज़्यादा भारतीय इंडस्ट्रीज़ और छोटे और मीडियम एंटरप्राइज़ ने इस प्रोजेक्ट में अहम योगदान दिया है।

दुनिया का कोई भी देश मदद को तैयार नहीं था

पिछले 40 सालों से भारत 'फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर' में अलग-अलग एक्सपेरिमेंट कर रहा था। दुनिया का कोई भी देश अपनी सेंसिटिव न्यूक्लियर एनर्जी टेक्नोलॉजी भारत के साथ शेयर करने को तैयार नहीं था। इसी वजह से आईजीकेयर ने अपने दम पर एक फुल-फ्लेज्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने का लक्ष्य हासिल किया और आज कलपक्कम में इसका फायदा मिला है।

उपलब्धि हासिल करने वाला रूस के बाद दूसरा देश होगा -

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल को इस उपलब्धि की घोषणा की। उन्होंने इस उपलब्धि को भारत की सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक निर्णायक कदम बताया। अगर यह प्रोजेक्ट सभी टेस्ट में सफल होता है और कमर्शियल ग्रिड से जुड़ जाता है, तो भारत रूस के बाद कमर्शियल पैमाने पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा। यह भारत के तीन-स्टेज न्यूक्लियर पावर प्रोग्राम के दूसरे फेज की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जो भविष्य में भारत के विशाल थोरियम भंडार के इस्तेमाल का रास्ता बनाती है।

भारत के लिए यह उपलब्धि कितनी बड़ी है? 

भारत के पास दुनिया के यूरेनियम भंडार का सिर्फ 1 प्रतिशत है। हालांकि, अकेले भारत के पास दुनिया के कुल थोरियम भंडार का 25 प्रतिशत है। अभी भारत एनर्जी के लिए बहुत ज़्यादा इम्पोर्ट पर निर्भर है, लेकिन इस रिएक्टर की सफलता से भारत अगले 400 सालों तक अपने थोरियम रिज़र्व से 500 गीगावाट बिजली बना सकेगा। इससे भारत बिना किसी विदेशी फ्यूल के न्यूक्लियर एनर्जी में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएगा।

अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने भी हार मान ली है...

फास्ट ब्रीडर टेक्नोलॉजी बहुत कॉम्प्लेक्स है। अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे एडवांस्ड देशों ने भी टेक्निकल और इकोनॉमिक वजहों से अपने प्रोग्राम बंद कर दिए हैं। ऐसे में भारत की यह सफलता बेमिसाल है।

बड़े इकोनॉमिक फायदे और जियोपॉलिटिकल सिक्योरिटी

अगर देश को सस्ती और भरपूर बिजली मिलती है, तो कुकिंग गैस, पेट्रोल और डीज़ल पर उसकी निर्भरता कम हो जाएगी। साथ ही, वेस्ट एशिया में तनाव या रेड सी संकट जैसी ग्लोबल घटनाओं से होने वाली तेल और गैस की कमी से भारत की इकोनॉमी सुरक्षित रहेगी। इससे भारत एनर्जी सेक्टर में भी आत्मनिर्भर हो जाएगा!

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