भारत का गौरव, ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले, खो गए; सीनियर साइंटिस्ट अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन



नई दिल्ली। ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट के रूसी साइंटिस्ट अलेक्जेंडर लियोनोव का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। जिऱकोन हाइपरसोनिक मिसाइल के डिज़ाइनर और भारत-रूस दोस्ती के प्रतीक इस महान साइंटिस्ट के करियर के बारे में जानें। भारत का गौरव, ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले, खो गए; सीनियर साइंटिस्ट अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन 7 भारत का गौरव, ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले, खो गए; सीनियर साइंटिस्ट अलेक्जेंडर लियोनोव का निधन

सारांश एआई से बना है, न्यूजड़ेस्क द्वारा रिव्यू किया गया है

ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट के मुख्य आर्किटेक्ट, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को कुचल दिया और जो भारत का गौरव है, और रूस के एक अनुभवी मिसाइल डिज़ाइनर, अलेक्जेंडर लियोनोव का 5 अप्रैल को निधन हो गया। वह 74 साल के थे। लियोनोव की मौत ने ग्लोबल डिफेंस सेक्टर में, खासकर भारत और रूस के जॉइंट डिफेंस प्रोजेक्ट्स में एक बहुत बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है।

ब्रह्मोस और लियोनोव के बीच रिश्ता

अलेक्जेंडर लियोनोव रूस की मशहूर एयरोस्पेस कंपनी निपोमॉस के सीईओ और चीफ डिज़ाइनर थे। यह कंपनी भारत के डीआरडीओ के साथ 'ब्रह्मोस एयरोस्पेस में मुख्य पार्टनर है। लियोनोव ने दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल, ब्रह्मोस को बनाने में अहम भूमिका निभाई।

जिऱकोन हाइपरसोनिक मिसाइल के जनक

लियोनोव सिफऱ् ब्रह्मोस तक ही सीमित नहीं थे। उन्हें रूसी बेड़े में सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल 'जिऱकोनÓ को डिज़ाइन करने का क्रेडिट भी दिया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने ग्रेनाइट, वल्कन और बैस्टियन जैसे एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम और कोस्टल डिफेंस सिस्टम को बनाने में अहम भूमिका निभाई।

ब्रह्मोस: दुनिया का सबसे तेज़ हथियार

भारत और रूस की दोस्ती की निशानी ब्रह्मोस मिसाइल आज दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक मानी जाती है। इस मिसाइल का इस्तेमाल 'ऑपरेशन सिंदूर' में भी असरदार तरीके से किया गया था। लियोनोव के टेक्निकल योगदान की वजह से ही भारत आज डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। उनके निधन पर भारतीय डिफेंस हलकों में भी दुख जताया जा रहा है।

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