भारत-जर्मनी के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, भारत में 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां


पीएम मोदी बोले- ऊर्जा क्षेत्र में हमारी प्राथमिकताएं समान

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में डेलीगेशन स्तर की बातचीत की, जिसमें भारत-जर्मनी के सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया।  यह बैठक दोनों देशों के बीच 25 साल पुरानी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हुई। पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि भारत और जर्मनी के बीच कई अहम समझौते हुए हैं। हमारा व्यापार सर्वोच्च स्तर पर है। हम मिलकर नई परियोजनाओं ओं पर काम कर रहे हैं। 

भारत-जर्मनी की करीबी पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण

पीएम मोदी ने कहा, 'भारत और जर्मनी जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच करीबी सहयोग पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने हमारी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा दी है। भारत और जर्मनी के बीच टेक्नोलॉजी सहयोग प्रति वर्ष मजबूत हुआ है और आज इसका प्रभाव धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मजऱ् का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे को-डेवलेपमेंट और को-प्रोडक्शन के नए अवसर खुलेंगे।Ó 

जर्मन यूनिवर्सिटी को भारत आने का न्योता

पीएम मोदी ने भारत और जर्मनी के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, 'भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे संबंध हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत की आज़ादी का ध्वज फहराकर, हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी। आज उच्च शिक्षा पर बना रोडमैप शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा। मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण देता हूं।Ó

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-जर्मनी एकमत

वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'आज हमने यूक्रेन और गाज़ा सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। हम एकमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत और जर्मनी इसके विरुद्ध एकजुट होकर पूरी दृढ़ता से लड़ाई जारी रखेंगे।  भारत और जर्मनी सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी4 के माध्यम से हमारा संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है।

पीएम मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें...

चांसलर मर्ज की ये यात्रा एक विशेष समय पर हो रही है। पिछले वर्ष हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए और इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी मना रहे हैं।

भारत-जर्मनी की अर्थव्यवस्थाओं के बीच करीबी सहयोग पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मर्ज का आभार व्यक्त करता हूं।

रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। बढ़ते व्यापार और निवेश संबंधों ने हमारी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को नई ऊर्जा दी है।

भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है। भारत और जर्मनी सहमत हैं कि ग्लोबल चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल इंस्टीट्यूशन में सुधार बहुत जरूरी है।

आज हायर एजुकेशन पर बना रोडमैप शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा। मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण देता हूं।

दोनों नेता सुबह साबरमती आश्रम पहुंचे

दोनों नेताओं ने सोमवार सुबह सबसे पहले अहमदाबाद में साबरमती आश्रम पहुंचकर महात्मा गांधी को नमन किया था। आश्रम के बाद मोदी-मर्ज साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे थे। यहां पर इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में शामिल होकर साथ में पतंग उड़ाई थी। वहीं, पीएम मोदी के तीन दिन के गुजरात दौरे का आज आखिरी दिन है।

मर्ज ने लिखा- गांधी के आदर्शों की आज ज्यादा जरूरत

आश्रम का दौरा करने के बाद फ्रेडरिक मर्ज ने गेस्ट बुक ने लिखा- महात्मा गांधी की अहिंसा की अवधारणा, स्वतंत्रता की शक्ति में उनका विश्वास और हरेक व्यक्ति की गरिमा में उनकी आस्था आज भी लोगों को प्रेरित करती है। गांधी के आदर्शों की आज पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है।

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