धर्मांतरण और सामाजिक अशांति के विरोध में आज 'छत्तीसगढ़ बंद'



- सर्व समाज ने खोला मोर्चा

रायपुर । छत्तीसगढ़ में बढ़ती सामाजिक अशांति, जनजातीय आस्था पर प्रहार और ईसाई मिशनरियों द्वारा कथित संगठित धर्मांतरण के विरोध में 'सर्व समाज' ने 24 दिसंबर को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया है। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में समाज के प्रमुखों ने शासन-प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए अपनी 5 सूत्रीय मांगें रखीं।

क्यों बुलाया गया छत्तीसगढ़ बंद?

सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि कांकेर जिले के आमाबेड़ा में हाल ही में हुई घटना कोई इकलौती घटना नहीं है। एक निश्चित पैटर्न के तहत ईसाई मिशनरियों और कन्वर्जन-प्रेरित समूहों द्वारा सुनियोजित ढंग से विवाद पैदा किया जा रहा है। समाज का आरोप है कि पाँचवीं अनुसूची के प्रावधानों और ग्राम सभा की शक्ति को नजरअंदाज कर जनजातीय परंपराओं को चोट पहुँचाई जा रही है।

प्रशासन और भीम आर्मी पर गंभीर आरोप

प्रेस वार्ता में यह आरोप लगाया गया कि आमाबेड़ा की घटना में जिला प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है। समाज के प्रमुखों ने कहा: बाहरी संगठन जैसे भीम आर्मी ने इस विवाद को भड़काने में संगठित भूमिका निभाई। कांकेर पुलिस ने ग्रामीणों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया। शांतिपूर्ण ग्रामीणों पर अत्यधिक पुलिस बल का प्रयोग किया गया।

सर्व समाज की 5 प्रमुख मांगें:

धर्म स्वातंत्र्य विधेयक: प्रदेश में प्रलोभन और दबावपूर्ण धर्मांतरण को रोकने के लिए 'धर्म स्वातंत्र्य विधेयकÓ को तत्काल और सख्ती से लागू किया जाए।

दोषियों पर कार्रवाई: आमाबेड़ा हमले के जिम्मेदार भीम आर्मी के तत्वों और कनवर्टेड समूहों पर कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई हो।

एसपी का निलंबन: कांकेर एसपी इंदिरा कल्याण एलेसेला का केवल तबादला पर्याप्त नहीं है, उन्हें तत्काल निलंबित कर उनकी भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों पर गाज: पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने वाले एसडीएम ए.एस. पैकरा और तहसीलदार सुधीर खलखो को निलंबित किया जाए।

मुकदमे वापसी और मुआवजा: ग्रामीणों पर दर्ज किए गए आपराधिक मामले वापस लिए जाएं और हिंसा से पीडि़त लोगों को समुचित मुआवजा दिया जाए।

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