सोमवार, 13 जुलाई 2020

इंद्रावती नदी के किनारे वृक्षारोपण अभियान ’आमचो इंद्रावती कठा लगाऊ बुटा’



  • डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से बस्तर जिले
  • में संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की

रायपुर। स्कूल शिक्षा, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, सहकारिता और बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने आज निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर जिले में संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की। उन्होंने बस्तर विकासखण्ड के भाटपाल में पढ़ाई तुहर दुआर कार्यक्रम के तहत् सामुदायिक रेडियो के माध्यम से गांव के बच्चों को पढ़ाई करवाने तथा प्रारंभिक शिक्षा के लिए नवाचार ’सीख कार्यक्रम’ और जिला प्रशासन के द्वारा इंद्रावती नदी के किनारे वृक्षारोपण अभियान ’आमचो इंद्रावती कठा लगाऊ बुटा’ की सराहना।

मंत्री डॉ. टेकाम ने वृक्षारोपण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कहा कि इंद्रावती नदी तट पर लगाए जाने वाले पौधों में जनजाति लोगों के हितो से संबंधित पौधों को प्राथमिकता दें, जिससे उन्हें वनोपज संग्रहण से आर्थिक लाभ हो। साथ ही पौधों के संरक्षण हेतु सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए। वृक्षारोपण में महुआ, हर्रा, बेहड़ा का वृक्षारोपण जंगलों में होना चाहिए, ताकि भविष्य सुरक्षित रहे। कलेक्टर श्री रजत बंसल ने बताया कि वृक्षारोपण अभियान जिले के अंदर प्रभावित हो रही इंद्रावती के दोनों किनारे पर 61 पंचायतों के ग्रामों में किया जा रहा है। ग्रामीणों के मांग के अनुसार ही वन और उद्यानिकी विभाग द्वारा पौधों का वितरण किया जा रहा है। पौधों के संरक्षण हेतु सामाजिक संस्थाओं, जागरूक नागरिक के साथ-साथ युवोदय अभियान के तहत् तीन हजार वालिटियर भी शामिल हो रहे हैं।

मंत्री डॉ. टेकाम ने लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों और सेवाओं का समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत् जिले में कुपोषण को दूर करने के लिए परिणाम उन्मूखी कार्य करने तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से एनीमिया को दूर करने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग लेने कहा। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में बरसात के समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। 

इसके अलावा उन्होंने हाट बाजार क्लिनिक की स्थिति, शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, की समीक्षा करते हुए कहा कि सघन बसे क्षेत्रों में जल भराव के कारण होने वाले बीमारी की रोकथाम के लिए निरंतर जांच की जाए और निगम के द्वारा सफाई की व्यवस्था, बिल्चिंग पाउडर का छिड़काव की व्यवस्था करें। जिले में फ्लोराइड और आर्सेनिक युक्त नलकूप वाले प्रभावित गांव के स्कूल, आश्रमशाला में पेयजल हेतु उपचार करवाने के निर्देश दिए। डॉ. टेकाम ने कहा कि पहुंचविहीन क्षेत्रों में जीवन रक्षक दवाओं का भंडारण कर लिया जाए। 

डॉ. टेकाम ने कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत किस गांव से कितना गोबर लिया जाना है, इसकी जानकारी एकत्र कर ली जाए। उन्होंने कहा कि हरेली त्यौहार के दिन से गोबर खरीदी की शुरूआत गौठानों से होगी। उन्होंने वन अधिकार मान्यता पत्र की समीक्षा करते हुए सामुदायिक अधिकार पत्र वितरण पर जोर दिया। डॉ. टेकाम ने कहा कि सामुदायिक अधिकार पत्र में वहां आय बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण, तेंदूपत्ता और वनोपज संग्रहण जैसी आर्थिक गतिविधियां संचालित की जाए। व्यक्तिगत वन अधिकारी मान्यता पत्र धारियों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जाए। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 8 हजार 721 किसानों को सम्मान निधि योजना से लाभान्वित किया जा चुका है। उन्होंने व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्र धारकों को भूमि समतलीकरण के साथ ही सहकारी समितियों से कृषि कार्य के लिए ऋण उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

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