भारत-पाक तनाव के बीच ‘कारवां-ए-अमन’ रवाना

श्रीनगर।  जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के फिदायीन हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 44 जवानों के शहीद होने के बाद पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने के बीच श्रीनगर से पाकिस्तानी के कब्जे वाले कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के बीच चलने वाली ‘कारवां-ए-अमन’ बस सोमवार को अपने गंतव्य की अोर रवाना हुई।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि साप्ताहिक बस सेवा फरवरी में नहीं चली लेकिन आज से फिर से यह चालू हो गयी। बस आज सुहब श्रीनगर के बेमीना से उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में उरी स्थित नियंत्रण रेखा पर आखिरी भारतीय चौकी कमान पोस्ट के लिए रवाना हुई।
अधिकारी ने बताया कि नियंत्रण रेखा पार जाने वाली यह बस उरी के ट्रेड फेशिलिटेशन केंद्र पहुंच गया है जहां से अधिकांश यात्री सवार होंगे। उन्होंने कहा कि दोपहर के बाद ही बस में सवार यात्रियों की सही संख्या के बारे में पता चल सकेगा। इसीप्रकार पाकिस्तान से भारत आने वाले यात्रियों की सही संख्या के बारे में देर शाम तक पता चल सकेगा।
इस बस के जरिये वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान अपने बिछड़े परिजनों से मुलाकात करने दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के देशों की यात्रा करते हैं। बिछड़े परिजनों को मिलाने के लिए इस बस सेवा की शुरूआत सात अप्रैल 2005 को की गयी थी।
इस बस सेवा के इस्तेमाल के लिए दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों की ओर से पुष्टि किये जाने के बाद केवल ‘ट्रैवल परमिट’ के आधार पर यात्री नियंत्रण रेखा के आर-पार जा सकते हैं। इसके लिए किसी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट की जरूरत नहीं है।
आतंकवादी संगठनों की चेतावनी के बावजूद हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी और डेमोक्रैटिक फ्रीडम पार्टी के प्रमुख शबीर अहमद शाह को छोड़ सभी अलगाववादी नेताओं ने इस बस सेवा का लाभ उठाया है।

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